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Wednesday, 8 November 2017

पौरुष शक्ति (Health)

                              वाजीकरण सूक्त (पोरुष शक्ति)
विनियोगः
ॐ इदम अथर्ववेद,  मंत्रस्य अथर्वाङ्गिरा ऋषि, शेपोऽर्क देवता, जगती अनुष्टुप् भुरिक् छन्द वाजीकरण सूक्त वाजीकरण हेतवे जप करिष्यामि l
मन्त्र


ओ३म् यथा॑सि॒तः प्र॒थय॑ते॒ वशा॒मनु॒ वपूं॑षि कृ॒ण्वन्नसु॑रस्य मा॒यया॑ । ए॒वा ते॒ शेपः॒ सह॑सा॒यम॒र्को ऽङ्गे॒नाङ्गं॒ संस॑मकं कृणोतु ॥ ओ३म् यथा॒ पस॑स्तायाद॒रं वाते॑न स्थूल॒भं कृ॒तम् । याव॑त्पर॒स्वतः॒ पस॒स्ताव॑त्ते वर्धतां॒ पसः॑ ॥ ओ३म् याव॑द॒ङ्गीनं॒ पार॑स्वतं॒ हास्ति॑नं॒ गार्द॑भम्च॒ यत् । याव॒दश्व॑स्य व॒जिन॒स्ताव॑त्ते वर्धतां॒ पसः॑ ॥

Tuesday, 7 November 2017

दिव्य लोक एवं सूक्ष्म लोक प्रवेश यन्त्र




दिव्य लोक एवं  सूक्ष्म लोक प्रवेश यन्त्र


।। ॐ ह्रीं ॐ ह्रीं ॐ ह्रीं ॐ उड्डय उड्डय मम जीवं शरीर बाह्य निकासय निकासय सूक्ष्म शरीर धरणाय इदम शरीरम सर्वत्र संचरय, उड्डय, दिव्य लोकम प्रवेशय, दृष्ट्य, कल्पना मध्ये दृष्टिगत व्यक्ति स्थान  लोकेन मनोवांछित भोतिक वस्तुम प्राप्तय प्राप्तय ह्रीं  ॐ ह्रीं ॐ ह्रीं ॐ स्थायित्वं स्थायित्वं स्थायित्वं ॐ ह्रीं ॐ ह्रीं ॐ ह्रीं ॐ ।।

जप कम से कम तीन दिन एक माला, पूर्ण ब्रह्मचर्य , और साधना के  नियम को कठोरता के साथ करें ।
और सोते हुवे आप कभी भी अपने शरीर से बाहर निकल जायेंगे, इसमें कोई कठोर योग साधना की जरुरत नहीं हैं । इसमें आप किसी जीवित व्यक्ति के शरीर में भी प्रवेश कर सकते हैं । और अगर कोई जो बिना किसी चोट के मृत्यु को प्राप्त हुआ जैसे पानी में डूब कर तो आप बिना उसके पास गए भी उसके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं ।
वस्तुत यह पूरा  परकाया प्रवेश से सम्बंधित प्रयोग नहीं हैं । पर इसके बहुत और भी अनुभव हैं l जो दिव्य लोको में किसी के प्रवेश की स्थितियों की  बहुत सी रचनायों को सामने लाता हैं । 



Tantra of English Language




इंग्लिश भाषा जो की पश्चिम की भाषा हैं इसके भी के भी कई तंत्र प्रयोग हैं l इसका एक बहुत ही सरल प्रयोग हैं ।कई बार घर में समाज में या फिर किसी कंपनी में एकता की आवश्यकता पड़ती हैं l इसके लिए निम्न यन्त्र हैं जो किसी वाइट कार्ड पेपर पर बना लीजिये और बिच में उन लोगो के समूह के नाम लिखिए जिनमे आपस में एकता करवानी हो l और अपनी शर्ट की जेब में रख लीजिये । बस इतना सा करने पर आपका काम पूरा हो जाता हैं ।

वृष्टिकर यन्त्र (Rainmaker)



गुरुदेव शंकराचार्यद्वारा रचित सौन्दर्यलहरी में १०० श्लोक दिए गए हैं | उनके साथ यन्त्र भी दिए गएँ हैं |

मैंने उनमे से कई का प्रयोग किया हैं | उनके प्रभाव अचूक एवम अद्बुत हैं |




वर्ष २००३ में मैंने पहली बार इस यन्त्र का प्रयोगकिया था तब से लेकर अब तक जितनी बार भी इसका प्रयोग किया गया हैं हर बार इसने अपना कार्य किया हैं |


1 इस यन्त्र को आप किसी कार्ड पेपर पर पेन या किसी और स्याही से बना लीजिये |
स्याही में हल्दी या कोई पीला रंग या वस्तु नहीं होने चाहियें |
इस साधना में आपको बस १५ -२० दिन इसी पर अपना ध्यान और शक्ति केन्द्रित करनी हैं
यहीं साधना हैं | मतलब आप पूजा स्थल या ये यन्त्र जहाँ रखा हो वहां दिन में कार्य स्थल पर रवाना होने से पहले या कभी भी इस पर दो मिनट अपना ध्यान लगाना हैं | या फिर इसको अपनी शर्ट की जेब में हृदय के सामने रख सकतें हैं | जेब में इसे आप इस तरह से रखे की यह आपके सम्मुख रहें |
2 ऐसे साधक जिन्होंने हाल ही पीताम्बर साधना की हो वें इस का प्रयोग न करें |
3 किसी भी तरह से पीले रंग से न जुड़ें |

आपको इसके साथ दिए गये मंत्र को जपने की जरुरत नहीं हैं मैंने कभी इस मंत्र का जप नहीं किया हैं | आप अगर मंत्र जपना चाहें तो वृष्टिकर शब्द के साथ चतुर्थी विभक्ति जैसे वृष्टिकराय में ह्रीं और ॐ का सम्पुट लगा कर जप कर सकते हैं |
इस यन्त्र का जब जब भी मैंने प्रयोग किया है तब तब ही वर्षा निश्चित रूप से हुई हैं चाहें उस समय वर्षा ऋतु हो या ना हो |



अपने मन में विश्वात्मा का चिंतन करें l अपने अन्दर विष्णु का ध्यान करें l तब आप इस विश्व से कनेक्ट हो पायेंगे l तब आप की प्रतिदिन की क्रिया विधि और प्रयोग इस विश्व में परिलक्षित होंगें l जो वैष्णव हैं वे इस प्रयोग को करें तो यह उनको विश्व यानी यानी विष्णु में तुरंत दिखाई देगा l इस प्रयोग को करें तो नीले या श्वेत वस्त्र पहने l ( रविवार को नील वस्त्र ना पहने )





गुरुत्व पीठ यन्त्र ( Gurutv pith yantra )




पंचदशी यन्त्र सूर्य का यन्त्र हैं यह यन्त्र संख्या 1 से प्रारम्भ होता हैं | जैसे नवकोष्ठोमें प्रथम से प्रारम्भ करें तो २ ९ ४ ,७ ५ ३ , ६ १ ८ इस तरह से और सब तरह से इसका योग 15 होता हैं | पंचदशी यन्त्र में यदि १ जोड़ दिया जाएँतो यह चन्द्र का यन्त्रबन जायेगा और इसी तरह क्रमश: सब ग्रहों कें यन्त्र बनेगें | नवकोष्ठोसे प्रारम्भ होने वाले किसी भी यन्त्र जिसका प्रत्येक ओर से योग एक समान आये वह आठ तरीके से बनाया जा सकता हैं |

पंचदशी यन्त्र जो कि 1 से प्रारम्भ होता हैं उसमे अगर 1 घटा दिया जाये तो जो यन्त्र बनेगा वो 0 से प्रारम्भ होगा
और इस तरह से 0 से प्रारम्भ होने वाले आठ यन्त्र बनेगें | उन्ही में से एक यन्त्र हैं गुरु सायुज्य यन्त्र इस यन्त्र की साधना से आप अपने गुरु को अपने आज्ञा चक्र पर अनुभव कर पायेगें |

मंत्र || ॐ ह्रीं गुरुत्व पीठाय ह्रीं ॐ ||

जप संख्या 5 माला
इस मंत्र को आप यन्त्रके साथ ही लिख सकतें हैं | कुमकुम हल्दीसे कार्ड पेपर पर यह यन्त्र बना लिजियें |इस यन्त्र को अंगूठी में बनवा कर तर्जनी या अंगूठे में पहना जा सकता हैं | मंत्र को भी यन्त्र के साथ लिखाजा सकता हैं |

शत्रुंजय यन्त्र (Destroy your enemy)


शत्रुंजय यन्त्र


सौन्दर्य लहरी में दिया गया शत्रुंजय यन्त्र

इस यन्त्र के बारे में मेरा इतना ही कहना हैं |

कदाचित इस यन्त्र का प्रयोगमैंने जीवन में पहले कर लिया होता तो जिस प्रतिशोध की ज्वाला मे, में 15 वर्ष तक जलता रहां वह बहुत पहले ही शांत हो गई होती | खैर जब मैंने इस यन्त्र का प्रयोग किया तो शत्रु बड़ी बाधा एवं कठिनाइयों में व्यस्त हो चूका था उसकी किसी अन्य से शत्रुता हो कर मार पीट वाली स्थितियांबन चुकी थी |करीब डेढ़ वर्ष पश्चात वापस शत्रु से त्रस्त हों कर मैंने इस यन्त्र का प्रयोग किया इस बार उसका वाहन सड़क पर किसी पत्थर से टकरा गया और उसका एक हाथ टूट चूका था |इस यन्त्र को किसी भी स्याही से कार्ड पेपर पर बना लिजियें और नित्य इसके सामने एक बार शत्रु नाश की कामना करियें आप को करीब पांच दिनों तक सिर्फ इसी पर अपना ध्यान केन्द्रित करना हैं | यदि आप सही हूएं तो शत्रु का नाश निश्चित हैं | आप इसके सामने एक दीप जला सकतें हैं और उसे आप अपनी जेब में भी रख सकतें हैं | इसें किसी अंगूठी पर बनवा कर मध्यमा या अनामिका में पहना जा सकता हैं | इसके सामने आप कोई भी शत्रु नाशक मंत्र का जप कर सकते हैं या नहीं भी करें तो भी कोई बात नहीं हैं |इसमें दियें गयें बीज मंत्र को भी आप बदल सकतें हैं जैसे हनुमान मंत्र या किसी अन्य देवी देवता का मंत्र या उनके अस्त्र शस्त्र को भी बना सकतें हैं |एक विशेष बात यह ध्यान में रखने की यह हैं की इसके प्रयोग की सफलता के लियें आपकी और शत्रु की दृष्टि एक बार मिलनी चाहियें या शत्रु एक बार आपको देंख लें चाहें आप उसको देखें ना देखें |इस यन्त्र की यह विशेषता हैं की इसको धारण करने के बाद इसके धारक में एक विशेष आत्मबल एवं शक्ति संचार होता हैं | उसकी मुख मुद्रा और चाल निडर और सिहों जैसी हो जाती हैं | मन शांत हो जाता हैं | यह यन्त्र ना सिर्फ शत्रु नाश के लियें बहुत उत्तम हैं बल्कि शांति के लियें भी जरुरी है | यह हर सदगृहस्थ के लियें एक आवश्यकयन्त्र हैं |






वैदिक धन प्राप्ति मंत्र

धन प्राप्ति वैदिक मंत्र

विनियोग:
  ॐ अस्य अथर्ववेद, द्रविणार्थप्रार्थना सूक्त, धन प्राप्ति सूक्त, भृगु ऋषिअनुष्टुप् त्रिपदार्षी गायत्री छन्दचन्द्रमा, रयि, त्वष्टा, सविता देवता,  द्रविण प्राप्ति हेतवे जप करिष्यामि
मंत्र 

ओ३म् धा॒ता द॑धातु नो र॒यिमीशा॑नो॒ जग॑त॒स्पतिः॑ । स नः॑ पू॒र्णेन॑ यछतु ॥ ओ३म् धा॒ता द॑धातु दा॒शुषे॒ प्राचीं॑ जी॒वातु॒मक्षि॑ताम् । व॒यम्दे॒वस्य॑ धीमहि सुम॒तिं वि॒श्वरा॑धसः ॥ ओ३म् धा॒ता विश्वा॒ वार्या॑ दधातु प्र॒जाका॑माय दा॒शुषे॑ दुरो॒णे । तस्मै॑ दे॒वा अ॒मृतं॒ सं व्य॑यन्तु॒ विश्वे॑ दे॒वा अदि॑तिः स॒जोषाः॑ ॥ ओ३म् धा॒ता रा॒तिः स॑वि॒तेदं जु॑षन्तां प्र॒जाप॑तिर्नि॒धिप॑तिर्नो अ॒ग्निः । त्वष्टा॒ विष्णुः॑ प्र॒जया॑ संररा॒णो यज॑मानाय॒ द्रवि॑णं दधातु ॥