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Tuesday, 19 May 2020

॥ श्रीअष्टलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली ॥

॥ श्रीअष्टलक्ष्मी अष्टोत्तरशतनामावली ॥

जय जय शङ्कर ।
ॐ श्री ललिता महात्रिपुरसुन्दरी
पराभट्टारिका समेताय
श्री चन्द्रमौळीश्वर परब्रह्मणे नमः ॥

१ श्री आदिलक्ष्मी नामावलिः ॥ ॐ श्रीं
२ श्री धान्यलक्ष्मी नामावलिः ॥ ॐ श्रीं क्लीं
३ श्री धैर्यलक्ष्मी नामावलिः ॥  ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं
४ श्री गजलक्ष्मी नामावलिः ॥ ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं
५ श्री सन्तानलक्ष्मी नामावलिः ॥ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं
६ श्री विजयलक्ष्मी नामावलिः ॥ ॐ क्लीं ॐ
७ श्री विद्यालक्ष्मी नामावलिः ॥  ॐ ऐं ॐ
८ श्री ऐश्वर्यलक्ष्मी नामावलिः ॥ ॐ श्रीं श्रीं श्रीं ॐ


ॐ श्रीं
आदिलक्ष्म्यै नमःअकारायै नमःअव्ययायै नमःअच्युतायै नमःआनन्दायै नमःअर्चितायै नमःअनुग्रहायै नमःअमृतायै नमःअनन्तायै नमःइष्टप्राप्त्यै नमःईश्वर्यै नमःकर्त्र्यै नमःकान्तायै नमःकलायै नमः
कल्याण्यै नमःकपर्दिने नमःकमलायै नमःकान्तिवर्धिन्यै नमःकुमार्यै नमःकामाक्ष्यै नमःकीर्तिलक्ष्म्यै नमः
गन्धिन्यै नमःगजारूढायै नमःगम्भीरवदनायै नमःचक्रहासिन्यै नमःचक्रायै नमःज्योतिलक्ष्म्यै नमः
जयलक्ष्म्यै नमःज्येष्ठायै नमःजगज्जनन्यै नमःजागृतायै नमःत्रिगुणायै नमःत्र्यैलोक्यमोहिन्यै नमः
त्र्यैलोक्यपूजितायै नमःनानारूपिण्यै नमःनिखिलायै नमःनारायण्यै नमःपद्माक्ष्यै नमःपरमायै नमः
प्राणायै नमःप्रधानायै नमःप्राणशक्त्यै नमःब्रह्माण्यै नमःभाग्यलक्ष्म्यै नमःभूदेव्यै नमःबहुरूपायै नमःभद्रकाल्यै नमःभीमायै नमःभैरव्यै नमःभोगलक्ष्म्यै नमःभूलक्ष्म्यै नमःमहाश्रियै नमःमाधव्यै नमःमात्रे नमःमहालक्ष्म्यै नमःमहावीरायै नमःमहाशक्त्यै नमःमालाश्रियै नमःराज्ञ्यै नमःरमायै नमःराज्यलक्ष्म्यै नमःरमणीयायै नमःलक्ष्म्यै नमःलाक्षितायै नमःलेखिन्यै नमःविजयलक्ष्म्यै नमःविश्वरूपिण्यै नमःविश्वाश्रयायै नमः
विशालाक्ष्यै नमःव्यापिन्यै नमःवेदिन्यै नमःवारिधये नमःव्याघ्र्यै नमःवाराह्यै नमःवैनायक्यै नमः
वरारोहायै नमःवैशारद्यै नमःशुभायै नमःशाकम्भर्यै नमःश्रीकान्तायै नमःकालायै नमःशरण्यै नमः
श्रुतये नमःस्वप्नदुर्गायै नमःसुर्यचन्द्राग्निनेत्रत्रयायै नमःसिम्हगायै नमःसर्वदीपिकायै नमः
स्थिरायै नमःसर्वसम्पत्तिरूपिण्यै नमःस्वामिन्यै नमःसितायै नमःसूक्ष्मायै नमःसर्वसम्पन्नायै नमः
हंसिन्यै नमःहर्षप्रदायै नमःहंसगायै नमःहरिसूतायै नमःहर्षप्राधान्यै नमःहरित्पतये नमःसर्वज्ञानायै नमःसर्वजनन्यै नमःमुखफलप्रदायै नमःमहारूपायै नमःश्रीकर्यै नमःश्रेयसे नमःश्रीचक्रमध्यगायै नमः
श्रीकारिण्यै नमःक्षमायै नमः  ॥ ॐ ॥




ॐ श्रीं क्लींधान्यलक्ष्म्यै नमःआनन्दाकृत्यै नमःअनिन्दितायै नमःआद्यायै नमःआचार्यायै नमःअभयायै नमः
अशक्यायै नमःअजयायै नमःअजेयायै नमःअमलायै नमःअमृतायै नमःअमरायै नमःइन्द्राणीवरदायै नमः
इन्दीवरेश्वर्यै नमःउरगेन्द्रशयनायै नमःउत्केल्यै नमःकाश्मीरवासिन्यै नमःकादम्बर्यै नमःकलरवायै नमः
कुचमण्डलमण्डितायै नमःकौशिक्यै नमःकृतमालायै नमःकौशाम्ब्यै नमःकोशवर्धिन्यै नमःखड्गधरायै नमः
खनये नमःखस्थायै नमःगीतायै नमःगीतप्रियायै नमःगीत्यै नमःगायत्र्यै नमःगौतम्यै नमःचित्राभरणभूषितायै नमःचाणूर्मदिन्यै नमःचण्डायै नमःचण्डहंत्र्यै नमःचण्डिकायै नमःगण्डक्यै नमःगोमत्यै नमःगाथायै नमःतमोहन्त्र्यै नमःत्रिशक्तिधृतेनमःतपस्विन्यै नमःजातवत्सलायै नमःजगत्यै नमःजंगमायै नमः
ज्येष्ठायै नमःजन्मदायै नमःज्वलितद्युत्यै नमःजगज्जीवायै नमःजगद्वन्द्यायै नमःधर्मिष्ठायै नमः
धर्मफलदायै नमःध्यानगम्यायै नमःधारणायै नमःधरण्यै नमःधवलायै नमःधर्माधारायै नमःधनायै नमःधारायै नमःधनुर्धर्यै नमःनाभसायै नमःनासायै नमःनूतनाङ्गायै नमःनरकघ्न्यै नमःनुत्यै नमःनागपाशधरायै नमः
नित्यायै नमःपर्वतनन्दिन्यै नमःपतिव्रतायै नमःपतिमय्यै नमःप्रियायै नमःप्रीतिमञ्जर्यै नमःपातालवासिन्यै नमःपूर्त्यै नमःपाञ्चाल्यै नमःप्राणिनां प्रसवे नमःपराशक्त्यै नमःबलिमात्रे नमःबृहद्धाम्न्यै नमःबादरायणसंस्तुतायै नमःभयघ्न्यै नमःभीमरूपायै नमःबिल्वायै नमःभूतस्थायै नमःमखायै नमः
मातामह्यै नमःमहामात्रे नमःमध्यमायै नमःमानस्यै नमःमनवे नमःमेनकायै नमःमुदायै नमः
यत्तत्पदनिबन्धिन्यै नमःयशोदायै नमःयादवायै नमःयूत्यै नमःरक्तदन्तिकायै नमःरतिप्रियायै नमःरतिकर्यै नमःरक्तकेश्यै नमःरणप्रियायै नमःलंकायै नमःलवणोदधये नमःलंकेशहंत्र्यै नमःलेखायै नमःवरप्रदायै नमः
वामनायै नमःवैदिक्यै नमःविद्युते नमःवारह्यै नमःसुप्रभायै नमःसमिधे नमः  ॥ ॐ ॥




ॐ  श्रीं ह्रीं क्लींधैर्यलक्ष्म्यै नमःअपूर्वायै नमः
अनाद्यायै नमःअदिरीश्वर्यै नमःअभीष्टायै नमःआत्मरूपिण्यै नमःअप्रमेयायै नमःअरुणायै नमःअलक्ष्यायै नमःअद्वैतायै नमःआदिलक्ष्म्यै नमःईशानवरदायै नमःइन्दिरायै नमःउन्नताकारायै नमःउद्धटमदापहायै नमःक्रुद्धायै नमःकृशाङ्ग्यै नमःकायवर्जितायै नमःकामिन्यै नमःकुन्तहस्तायै नमःकुलविद्यायै नमःकौलिक्यै नमःकाव्यशक्त्यै नमःकलात्मिकायै नमःखेचर्यै नमःखेटकामदायै नमःगोप्त्र्यै नमःगुणाढ्यायै नमःगवे नमःचन्द्रायै नमःचारवे नमःचन्द्रप्रभायै नमःचञ्चवे नमःचतुराश्रमपूजितायै नमःचित्यै नमःगोस्वरूपायै नमःगौतमाख्यमुनिस्तुतायै नमःगानप्रियायै नमःछद्मदैत्यविनाशिन्यै नमःजयायै नमःजयन्त्यै नमःजयदायै नमःजगत्त्रयहितैषिण्यै नमःजातरूपायै नमःज्योत्स्नायै नमःजनतायै नमःतारायै नमः
त्रिपदायै नमःतोमरायै नमःतुष्ट्यै नमःधनुर्धरायै नमःधेनुकायै नमःध्वजिन्यै नमःधीरायै नमःधूलिध्वान्तहरायै नमःध्वनये नमःध्येयायै नमःधन्यायै नमःनौकायै नमःनीलमेघसमप्रभायै नमःनव्यायै नमःनीलाम्बरायै नमःनखज्वालायै नमःनलिन्यै नमःपरात्मिकायै नमःपरापवादसंहर्त्र्यै नमःपन्नगेन्द्रशयनायै नमःपतगेन्द्रकृतासनायै नमःपाकशासनायै नमःपरशुप्रियायै नमःबलिप्रियायै नमःबलदायै नमःबालिकायै नमःबालायै नमःबदर्यै नमःबलशालिन्यै नमःबलभद्रप्रियायै नमःबुद्ध्यै नमःबाहुदायै नमःमुख्यायै नमःमोक्षदायै नमःमीनरूपिण्यै नमःयज्ञायै नमःयज्ञाङ्गायै नमःयज्ञकामदायै नमःयज्ञरूपायै नमःयज्ञकर्त्र्यै नमःरमण्यै नमःराममूर्त्यै नमःरागिण्यै नमःरागज्ञायै नमःरागवल्लभायै नमःरत्नगर्भायै नमःरत्नखन्यै नमः
राक्षस्यै नमःलक्षणाढ्यायै नमःलोलार्कपरिपूजितायै नमःवेत्रवत्यै नमःविश्वेशायै नमःवीरमात्रे नमःवीरश्रियै नमःवैष्णव्यै नमःशुच्यै नमःश्रद्धायै नमःशोणाक्ष्यै नमःशेषवन्दितायै नमःशताक्षयै नमःहतदानवायै नमः
हयग्रीवतनवे नमः ॥ ॐ ॥




ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं
गजलक्ष्म्यै नमः
अनन्तशक्त्यै नमः
अज्ञेयायै नमः
अणुरूपायै नमः
अरुणाकृत्यै नमः
अवाच्यायै नमः
अनन्तरूपायै नमः
अम्बुदायै नमः
अम्बरसंस्थाङ्कायै नमः
अशेषस्वरभूषितायै नमः
इच्छायै नमः
इन्दीवरप्रभायै नमः
उमायै नमः
ऊर्वश्यै नमः
उदयप्रदायै नमः
कुशावर्तायै नमः
कामधेनवे नमः
कपिलायै नमः
कुलोद्भवायै नमः
कुङ्कुमाङ्कितदेहायै नमः
कुमार्यै नमः
कुङ्कुमारुणायै नमः
काशपुष्पप्रतीकाशायै नमः
खलापहायै नमः
खगमात्रे नमः
खगाकृत्यै नमः
गान्धर्वगीतकीर्त्यै नमः
गेयविद्याविशारदायै नमः
गम्भीरनाभ्यै नमः
गरिमायै नमः
चामर्यै नमः
चतुराननायै नमः
चतुःषष्टिश्रीतन्त्रपूजनीयायै नमः
चित्सुखायै नमः
चिन्त्यायै नमः
गम्भीरायै नमः
गेयायै नमः
गन्धर्वसेवितायै नमः
जरामृत्युविनाशिन्यै नमः
जैत्र्यै नमः
जीमूतसंकाशायै नमः
जीवनायै नमः
जीवनप्रदायै नमः
जितश्वासायै नमः
जितारातये नमः
जनित्र्यै नमः
तृप्त्यै नमः
त्रपायै नमः
तृषायै नमः
दक्षपूजितायै नमः
दीर्घकेश्यै नमः
दयालवे नमः
दनुजापहायै नमः
दारिद्र्यनाशिन्यै नमः
द्रवायै नमः
नीतिनिष्ठायै नमः
नाकगतिप्रदायै नमः
नागरूपायै नमः
नागवल्ल्यै नमः
प्रतिष्ठायै नमः
पीताम्बरायै नमः
परायै नमः
पुण्यप्रज्ञायै नमः
पयोष्ण्यै नमः
पम्पायै नमः
पद्मपयस्विन्यै नमः
पीवरायै नमः
भीमायै नमः
भवभयापहायै नमः
भीष्मायै नमः
भ्राजन्मणिग्रीवायै नमः
भ्रातृपूज्यायै नमः
भार्गव्यै नमः
भ्राजिष्णवे नमः
भानुकोटिसमप्रभायै नमः
मातङ्ग्यै नमः
मानदायै नमः
मात्रे नमः
मातृमण्डलवासिन्यै नमः
मायायै नमः
मायापुर्यै नमः
यशस्विन्यै नमः
योगगम्यायै नमः
योग्यायै नमः
रत्नकेयूरवलयायै नमः
रतिरागविवर्धिन्यै नमः
रोलम्बपूर्णमालायै नमः
रमणीयायै नमः
रमापत्यै नमः
लेख्यायै नमः
लावण्यभुवे नमः
लिप्यै नमः
लक्ष्मणायै नमः
वेदमात्रे नमः
वह्निस्वरूपधृषे नमः
वागुरायै नमः
वधुरूपायै नमः
वालिहंत्र्यै नमः
वराप्सरस्यै नमः
शाम्बर्यै नमः
शमन्यै नमः
शांत्यै नमः
सुन्दर्यै नमः
सीतायै नमः
सुभद्रायै नमः
क्षेमङ्कर्यै नमः
क्षित्यै नमः 
॥ ॐ ॥




ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं
सन्तानलक्ष्म्यै नमः
असुरघ्न्यै नमः
अर्चितायै नमः
अमृतप्रसवे नमः
अकाररूपायै नमः
अयोध्यायै नमः
अश्विन्यै नमः
अमरवल्लभायै नमः
अखण्डितायुषे नमः
इन्दुनिभाननायै नमः
इज्यायै नमः
इन्द्रादिस्तुतायै नमः
उत्तमायै नमः
उत्कृष्टवर्णायै नमः
उर्व्यै नमः
कमलस्रग्धरायै नमः
कामवरदायै नमः
कमठाकृत्यै नमः
काञ्चीकलापरम्यायै नमः
कमलासनसंस्तुतायै नमः
कम्बीजायै नमः
कौत्सवरदायै नमः
कामरूपनिवासिन्यै नमः
खड्गिन्यै नमः
गुणरूपायै नमः
गुणोद्धतायै नमः
गोपालरूपिण्यै नमः
गोप्त्र्यै नमः
गहनायै नमः
गोधनप्रदायै नमः
चित्स्वरूपायै नमः
चराचरायै नमः
चित्रिण्यै नमः
चित्रायै नमः
गुरुतमायै नमः
गम्यायै नमः
गोदायै नमः
गुरुसुतप्रदायै नमः
ताम्रपर्ण्यै नमः
तीर्थमय्यै नमः
तापस्यै नमः
तापसप्रियायै नमः
त्र्यैलोक्यपूजितायै नमः
जनमोहिन्यै नमः
जलमूर्त्यै नमः
जगद्बीजायै नमः
जनन्यै नमः
जन्मनाशिन्यै नमः
जगद्धात्र्यै नमः
जितेन्द्रियायै नमः
ज्योतिर्जायायै नमः
द्रौपद्यै नमः
देवमात्रे नमः
दुर्धर्षायै नमः
दीधितिप्रदायै नमः
दशाननहरायै नमः
डोलायै नमः
द्युत्यै नमः
दीप्तायै नमः
नुत्यै नमः
निषुम्भघ्न्यै नमः
नर्मदायै नमः
नक्षत्राख्यायै नमः
नन्दिन्यै नमः
पद्मिन्यै नमः
पद्मकोशाक्ष्यै नमः
पुण्डलीकवरप्रदायै नमः
पुराणपरमायै नमः
प्रीत्यै नमः
भालनेत्रायै नमः
भैरव्यै नमः
भूतिदायै नमः
भ्रामर्यै नमः
भ्रमायै नमः
भूर्भुवस्वः स्वरूपिण्यै नमः
मायायै नमः
मृगाक्ष्यै नमः
मोहहंत्र्यै नमः
मनस्विन्यै नमः
महेप्सितप्रदायै नमः
मात्रमदहृतायै नमः
मदिरेक्षणायै नमः
युद्धज्ञायै नमः
यदुवंशजायै नमः
यादवार्तिहरायै नमः
युक्तायै नमः
यक्षिण्यै नमः
यवनार्दिन्यै नमः
लक्ष्म्यै नमः
लावण्यरूपायै नमः
ललितायै नमः
लोललोचनायै नमः
लीलावत्यै नमः
लक्षरूपायै नमः
विमलायै नमः
वसवे नमः
व्यालरूपायै नमः
वैद्यविद्यायै नमः
वासिष्ठ्यै नमः
वीर्यदायिन्यै नमः
शबलायै नमः
शांतायै नमः
शक्तायै नमः
शोकविनाशिन्यै नमः
शत्रुमार्यै नमः
शत्रुरूपायै नमः
सरस्वत्यै नमः
सुश्रोण्यै नमः
सुमुख्यै नमः
हावभूम्यै नमः
हास्यप्रियायै नमः 
॥ ॐ ॥




ॐ क्लीं ॐ
विजयलक्ष्म्यै नमः
अम्बिकायै नमः
अम्बालिकायै नमः
अम्बुधिशयनायै नमः
अम्बुधये नमः
अन्तकघ्न्यै नमः
अन्तकर्त्र्यै नमः
अन्तिमायै नमः
अन्तकरूपिण्यै नमः
ईड्यायै नमः
इभास्यनुतायै नमः
ईशानप्रियायै नमः
ऊत्यै नमः
उद्यद्भानुकोटिप्रभायै नमः
उदाराङ्गायै नमः
केलिपरायै नमः
कलहायै नमः
कान्तलोचनायै नमः
काञ्च्यै नमः
कनकधारायै नमः
कल्यै नमः
कनककुण्डलायै नमः
खड्गहस्तायै नमः
खट्वाङ्गवरधारिण्यै नमः
खेटहस्तायै नमः
गन्धप्रियायै नमः
गोपसख्यै नमः
गारुड्यै नमः
गत्यै नमः
गोहितायै नमः
गोप्यायै नमः
चिदात्मिकायै नमः
चतुर्वर्गफलप्रदायै नमः
चतुराकृत्यै नमः
चकोराक्ष्यै नमः
चारुहासायै नमः
गोवर्धनधरायै नमः
गुर्व्यै नमः
गोकुलाभयदायिन्यै नमः
तपोयुक्तायै नमः
तपस्विकुलवन्दितायै नमः
तापहारिण्यै नमः
तार्क्षमात्रे नमः
जयायै नमः
जप्यायै नमः
जरायवे नमः
जवनायै नमः
जनन्यै नमः
जाम्बूनदविभूषायै नमः
दयानिध्यै नमः
ज्वालायै नमः
जम्भवधोद्यतायै नमः
दुःखहंत्र्यै नमः
दान्तायै नमः
द्रुतेष्टदायै नमः
दात्र्यै नमः
दीनर्तिशमनायै नमः
नीलायै नमः
नागेन्द्रपूजितायै नमः
नारसिम्ह्यै नमः
नन्दिनन्दायै नमः
नन्द्यावर्तप्रियायै नमः
निधये नमः
परमानन्दायै नमः
पद्महस्तायै नमः
पिकस्वरायै नमः
पुरुषार्थप्रदायै नमः
प्रौढायै नमः
प्राप्त्यै नमः
बलिसंस्तुतायै नमः
बालेन्दुशेखरायै नमः
बन्द्यै नमः
बालग्रहविनाशन्यै नमः
ब्राह्म्यै नमः
बृहत्तमायै नमः
बाणायै नमः
ब्राह्मण्यै नमः
मधुस्रवायै नमः
मत्यै नमः
मेधायै नमः
मनीषायै नमः
मृत्युमारिकायै नमः
मृगत्वचे नमः
योगिजनप्रियायै नमः
योगाङ्गध्यानशीलायै नमः
यज्ञभुवे नमः
यज्ञवर्धिन्यै नमः
राकायै नमः
राकेन्दुवदनायै नमः
रम्यायै नमः
रणितनूपुरायै नमः
रक्षोघ्न्यै नमः
रतिदात्र्यै नमः
लतायै नमः
लीलायै नमः
लीलानरवपुषे नमः
लोलायै नमः
वरेण्यायै नमः
वसुधायै नमः
वीरायै नमः
वरिष्ठायै नमः
शातकुम्भमय्यै नमः
शक्त्यै नमः
श्यामायै नमः
शीलवत्यै नमः
शिवायै नमः
होरायै नमः
हयगायै नमः 
॥ ॐ ॥




ऐं ॐ
विद्यालक्ष्म्यै नमः
वाग्देव्यै नमः
परदेव्यै नमः
निरवद्यायै नमः
पुस्तकहस्तायै नमः
ज्ञानमुद्रायै नमः
श्रीविद्यायै नमः
विद्यारूपायै नमः
शास्त्रनिरूपिण्यै नमः
त्रिकालज्ञानायै नमः
सरस्वत्यै नमः
महाविद्यायै नमः
वाणिश्रियै नमः
यशस्विन्यै नमः
विजयायै नमः
अक्षरायै नमः
वर्णायै नमः
पराविद्यायै नमः
कवितायै नमः
नित्यबुद्धायै नमः
निर्विकल्पायै नमः
निगमातीतायै नमः
निर्गुणरूपायै नमः
निष्कलरूपायै नमः
निर्मलायै नमः
निर्मलरूपायै नमः
निराकारायै नमः
निर्विकारायै नमः
नित्यशुद्धायै नमः
बुद्ध्यै नमः
मुक्त्यै नमः
नित्यायै नमः
निरहङ्कारायै नमः
निरातङ्कायै नमः
निष्कलङ्कायै नमः
निष्कारिण्यै नमः
निखिलकारणायै नमः
निरीश्वरायै नमः
नित्यज्ञानायै नमः
निखिलाण्डेश्वर्यै नमः
निखिलवेद्यायै नमः
गुणदेव्यै नमः
सुगुणदेव्यै नमः
सर्वसाक्षिण्यै नमः
सच्चिदानन्दायै नमः
सज्जनपूजितायै नमः
सकलदेव्यै नमः
मोहिन्यै नमः
मोहवर्जितायै नमः
मोहनाशिन्यै नमः
शोकायै नमः
शोकनाशिन्यै नमः
कालायै नमः
कालातीतायै नमः
कालप्रतीतायै नमः
अखिलायै नमः
अखिलनिदानायै नमः
अजरामरायै नमः
अजहितकारिण्यै नमः
त्रिग़ुणायै नमः
त्रिमूर्त्यै नमः
भेदविहीनायै नमः
भेदकारणायै नमः
शब्दायै नमः
शब्दभण्डारायै नमः
शब्दकारिण्यै नमः
स्पर्शायै नमः
स्पर्शविहीनायै नमः
रूपायै नमः
रूपविहीनायै नमः
रूपकारणायै नमः
रसगन्धिन्यै नमः
रसविहीनायै नमः
सर्वव्यापिन्यै नमः
मायारूपिण्यै नमः
प्रणवलक्ष्म्यै नमः
मात्रे नमः
मातृस्वरूपिण्यै नमः
ह्रीङ्कार्यै
ॐकार्यै नमः
शब्दशरीरायै नमः
भाषायै नमः
भाषारूपायै नमः
गायत्र्यै नमः
विश्वायै नमः
विश्वरूपायै नमः
तैजसे नमः
प्राज्ञायै नमः
सर्वशक्त्यै नमः
विद्याविद्यायै नमः
विदुषायै नमः
मुनिगणार्चितायै नमः
ध्यानायै नमः
हंसवाहिन्यै नमः
हसितवदनायै नमः
मन्दस्मितायै नमः
अम्बुजवासिन्यै नमः
मयूरायै नमः
पद्महस्तायै नमः
गुरुजनवन्दितायै नमः
सुहासिन्यै नमः
मङ्गलायै नमः
वीणापुस्तकधारिण्यै नमः 
॥ ॐ ॥




श्रीं श्रीं श्रीं ॐ
ऐश्वर्यलक्ष्म्यै नमः
अनघायै नमः
अलिराज्यै नमः
अहस्करायै नमः
अमयघ्न्यै नमः
अलकायै नमः
अनेकायै नमः
अहल्यायै नमः
आदिरक्षणायै नमः
इष्टेष्टदायै नमः
इन्द्राण्यै नमः
ईशेशान्यै नमः
इन्द्रमोहिन्यै नमः
उरुशक्त्यै नमः
उरुप्रदायै नमः
ऊर्ध्वकेश्यै नमः
कालमार्यै नमः
कालिकायै नमः
किरणायै नमः
कल्पलतिकायै नमः
कल्पस्ंख्यायै नमः
कुमुद्वत्यै नमः
काश्यप्यै नमः
कुतुकायै नमः
खरदूषणहंत्र्यै नमः
खगरूपिण्यै नमः
गुरवे नमः
गुणाध्यक्षायै नमः
गुणवत्यै नमः
गोपीचन्दनचर्चितायै नमः
हङ्गायै नमः
चक्षुषे नमः
चन्द्रभागायै नमः
चपलायै नमः
चलत्कुण्डलायै नमः
चतुःषष्टिकलाज्ञानदायिन्यै नमः
चाक्षुषी मनवे नमः
चर्मण्वत्यै नमः
चन्द्रिकायै नमः
गिरये नमः
गोपिकायै नमः
जनेष्टदायै नमः
जीर्णायै नमः
जिनमात्रे नमः
जन्यायै नमः
जनकनन्दिन्यै नमः
जालन्धरहरायै नमः
तपःसिद्ध्यै नमः
तपोनिष्ठायै नमः
तृप्तायै नमः
तापितदानवायै नमः
दरपाणये नमः
द्रग्दिव्यायै नमः
दिशायै नमः
दमितेन्द्रियायै नमः
दृकायै नमः
दक्षिणायै नमः
दीक्षितायै नमः
निधिपुरस्थायै नमः
न्यायश्रियै नमः
न्यायकोविदायै नमः
नाभिस्तुतायै नमः
नयवत्यै नमः
नरकार्तिहरायै नमः
फणिमात्रे नमः
फलदायै नमः
फलभुजे नमः
फेनदैत्यहृते नमः
फुलाम्बुजासनायै नमः
फुल्लायै नमः
फुल्लपद्मकरायै नमः
भीमनन्दिन्यै नमः
भूत्यै नमः
भवान्यै नमः
भयदायै नमः
भीषणायै नमः
भवभीषणायै नमः
भूपतिस्तुतायै नमः
श्रीपतिस्तुतायै नमः
भूधरधरायै नमः
भुतावेशनिवासिन्यै नमः
मधुघ्न्यै नमः
मधुरायै नमः
माधव्यै नमः
योगिन्यै नमः
यामलायै नमः
यतये नमः
यन्त्रोद्धारवत्यै नमः
रजनीप्रियायै नमः
रात्र्यै नमः
राजीवनेत्रायै नमः
रणभूम्यै नमः
रणस्थिरायै नमः
वषट्कृत्यै नमः
वनमालाधरायै नमः
व्याप्त्यै नमः
विख्यातायै नमः
शरधन्वधरायै नमः
श्रितये नमः
शरदिन्दुप्रभायै नमः
शिक्षायै नमः
शतघ्न्यै नमः
शांतिदायिन्यै नमः
ह्रीं बीजायै नमः
हरवन्दितायै नमः
हालाहलधरायै नमः
हयघ्न्यै नमः
हंसवाहिन्यै नमः 
॥ ॐ ॥




श्रीं ह्रीं क्लीं
महालक्ष्म्यै नमः
मन्त्रलक्ष्म्यै नमः
मायालक्ष्म्यै नमः
मतिप्रदायै नमः
मेधालक्ष्म्यै नमः
मोक्षलक्ष्म्यै नमः
महीप्रदायै नमः
वित्तलक्ष्म्यै नमः
मित्रलक्ष्म्यै नमः
मधुलक्ष्म्यै नमः
कान्तिलक्ष्म्यै नमः
कार्यलक्ष्म्यै नमः
कीर्तिलक्ष्म्यै नमः
करप्रदायै नमः
कन्यालक्ष्म्यै नमः
कोशलक्ष्म्यै नमः
काव्यलक्ष्म्यै नमः
कलाप्रदायै  नमः
गजलक्ष्म्यै नमः
गन्धलक्ष्म्यै नमः
गृहलक्ष्म्यै नमः
गुणप्रदायै नमः
जयलक्ष्म्यै नमः
जीवलक्ष्म्यै नमः
जयप्रदायै नमः
दानलक्ष्म्यै नमः
दिव्यलक्ष्म्यै नमः
द्वीपलक्ष्म्यै नमः
दयाप्रदायै नमः
धनलक्ष्म्यै नमः
धेनुलक्ष्म्यै नमः
धनप्रदायै नमः
धर्मलक्ष्म्यै नमः
धैर्यलक्ष्म्यै नमः
द्रव्यलक्ष्म्यै नमः
धृतिप्रदायै नमः
नभोलक्ष्म्यै नमः
नादलक्ष्म्यै नमः
नेत्रलक्ष्म्यै नमः
नयप्रदायै नमः
नाट्यलक्ष्म्यै नमः
नीतिलक्ष्म्यै नमः
नित्यलक्ष्म्यै नमः
निधिप्रदायै नमः
पूर्णलक्ष्म्यै नमः
पुष्पलक्ष्म्यै नमः
पशुप्रदायै नमः
पुष्टिलक्ष्म्यै नमः
पद्मलक्ष्म्यै नमः
पूतलक्ष्म्यै नमः
प्रजाप्रदायै नमः
प्राणलक्ष्म्यै नमः
प्रभालक्ष्म्यै नमः
प्रज्ञालक्ष्म्यै नमः
फलप्रदायै नमः
बुधलक्ष्म्यै नमः
बुद्धिलक्ष्म्यै नमः
बललक्ष्म्यै नमः
बहुप्रदायै नमः
भाग्यलक्ष्म्यै नमः
भोगलक्ष्म्यै नमः
भुजलक्ष्म्यै नमः
भक्तिप्रदायै नमः
भावलक्ष्म्यै नमः
भीमलक्ष्म्यै नमः
भूर्लक्ष्म्यै नमः
भूषणप्रदायै नमः
रूपलक्ष्म्यै नमः
राज्यलक्ष्म्यै नमः
राजलक्ष्म्यै नमः
रमाप्रदायै नमः
वीरलक्ष्म्यै नमः
वार्धिकलक्ष्म्यै नमः
विद्यालक्ष्म्यै नमः
वरलक्ष्म्यै नमः
वर्षलक्ष्म्यै नमः
वनलक्ष्म्यै नमः
वधूप्रदायै नमः
वर्णलक्ष्म्यै नमः
वश्यलक्ष्म्यै नमः
वाग्लक्ष्म्यै नमः
वैभवप्रदायै नमः
शौर्यलक्ष्म्यै नमः
शांतिलक्ष्म्यै नमः
शक्तिलक्ष्म्यै नमः
शुभप्रदायै नमः
श्रुतिलक्ष्म्यै नमः
शास्त्रलक्ष्म्यै नमः
श्रीलक्ष्म्यै नमः
शोभनप्रदायै नमः
स्थिरलक्ष्म्यै नमः
सिद्धिलक्ष्म्यै नमः
सत्यलक्ष्म्यै नमः
सुधाप्रदायै नमः
सैन्यलक्ष्म्यै नमः
सामलक्ष्म्यै नमः
सस्यलक्ष्म्यै नमः
सुतप्रदायै नमः
साम्राज्यलक्ष्म्यै नमः
सल्लक्ष्म्यै नमः
ह्रीलक्ष्म्यै नमः
आढ्यलक्ष्म्यै नमः
आयुर्लक्ष्म्यै नमः
आरोग्यदायै नमः
श्री महालक्ष्म्यै नमः 
॥ ॐ ॥



नमः सर्व स्वरूपे च नमो कल्याणदायिके ।
महासम्पत्प्रदे देवि धनदायै नमोऽस्तुते ॥

महाभोगप्रदे देवि महाकामप्रपूरिते ।
सुखमोक्षप्रदे देवि धनदायै नमोऽस्तुते ॥

ब्रह्मरूपे सदानन्दे सच्चिदानन्दरूपिणी ।
धृतसिद्धिप्रदे देवि धनदायै नमोऽस्तुते ॥

उद्यत्सूर्यप्रकाशाभे उद्यदादित्यमण्डले ।
शिवतत्वप्रदे देवि धनदायै नमोऽस्तुते  ॥

शिवरूपे शिवानन्दे कारणानन्दविग्रहे ।
विश्वसंहाररूपे च धनदायै नमोऽस्तुते ॥

पञ्चतत्वस्वरूपे च पञ्चाचारसदारते ।
साधकाभीष्टदे देवि धनदायै नमोऽस्तुते  ॥

श्रीं ॐ ॥

ॐ श्री ललिता महात्रिपुरसुन्दरी पराभट्टारिका ।
समेताय श्री चन्द्रमौळीश्वर परब्रह्मणे नमः ॥

जय जय शङ्कर हर हर शङ्कर ॥

॥ श्रीअष्टलक्ष्मीस्तुतिः ॥

॥ श्रीअष्टलक्ष्मीस्तुतिः ॥
आदिलक्ष्मीः ।
सुमनोवन्दितसुन्दरि माधवि चन्द्रसहोदरि हेममयि
मुनिगणकाङ्क्षितमोक्षप्रदायिनि मञ्जुलभाषिणि वेदनुते ।
पङ्कजवासिनि देवसुपूजिते सद्गुणवर्षिणि शान्तियुते
जय जय हे मधुसूदनकामिनि आदिलक्ष्मि परिपालय माम् ॥

धनलक्ष्मीः ।
अयि कलिकल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमयि
क्षीरसमुद्भवमङ्गलरूपिणि मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।
मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि देवगणाश्रितपादयुगे
जय जय हे मधुसूदनकामिनि धान्यलक्ष्मि परिपालय माम् ॥

धैर्यलक्ष्मीः ।
जय वरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमयि
सुरगणविनुते अतिशयफलदे ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते ।
भवभयहारिणि पापविमोचिनि साधुसमाश्रितपादयुगे
जय जय हे मधुसूदनकामिनि धैर्यलक्ष्मि परिपालय माम् ॥

गजलक्ष्मीः ।
जय जय दुर्गतिनाशिनि कामिनि बहुदे शुभकलहंसगते
रथगजतुरगपदादिसमावृतपरिजनमण्डितराजनुते ।
सुरवरधनपतिपद्मजसेविततापनिवारकपादयुगे
जय जय हे मधुसूदनकामिनि गजलक्ष्मि परिपालय माम् ॥

सन्तानलक्ष्मीः ।
अयि खगवाहे मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि सन्मतिदे
गुणगणवारिधे लोकहितैषिणि नारदतुम्बुरुगाननुते ।
सकलसुरासुरदेवमुनीश्वरभूसुरवन्दितपादयुगे
जय जय हे मधुसूदनकामिनि सन्तानलक्ष्मि परिपालय माम् ॥

विजयलक्ष्मीः ।
कमलनिवासिनि सद्गतिदायिनि विज्ञानविकासिनि काममयि
अनुदिनमर्चितकुङ्कुमभासुरभूषणशोभि सुगात्रयुते ।
सुरमुनिसंस्तुतवैभवराजितदीनजानाश्रितमान्यपदे
जय जय हे मधुसूदनकामिनि विजयलक्ष्मि परिपालय माम् ॥

ऐश्वर्यलक्ष्मीः ।
प्रणतसुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमयि
मणिगणभूषितकर्णविभूषणकान्तिसमावृतहासमुखि ।
नवनिधिदायिनि कलिमलहारिणि कामितवरदे कल्पलते
जय जय हे मधुसूदनकामिनि ऐश्वर्यलक्ष्मि परिपालय माम् ॥

धनलक्ष्मीः ।
धिमिधिमिधिन्धिमिदुन्दुमदुमदुमदुन्दुभिनादविनोदरते
बम्बम्बों बम्बम्बों प्रणवोच्चारशङ्खनिनादयुते ।
वेदपुराणस्मृतिगणदर्शितसत्पदसज्जनशुभफलदे
जय जय हे मधुसूदनकामिनि धनलक्ष्मि परिपालय माम् ॥

इति श्रीअष्टलक्ष्मीस्तुतिः सम्पूर्णा ।

कनकधारास्तोत्रम्

कनकधारास्तोत्रम् 

अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।
अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला
माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गळदेवतायाः ॥ १॥

मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि ।
माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या
सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः ॥ २॥

आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दं
आनन्दकन्दमनिमेषमनङ्गतन्त्रम् ।
आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रं
भूत्यै भवेन्मम भुजङ्गशयाङ्गनायाः ॥ ३॥

बाह्वन्तरे मधुजितः श्रितकौस्तुभे या
हारावलीव हरिनीलमयी विभाति ।
कामप्रदा भगवतोऽपि कटाक्षमाला
कल्याणमावहतु मे कमलालयायाः ॥ ४॥

कालाम्बुदाळिललितोरसि कैटभारेः
धाराधरे स्फुरति या तडिदङ्गनेव ।
मातुस्समस्तजगतां महनीयमूर्तिः
भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनायाः ॥ ५॥

प्राप्तं पदं प्रथमतः खलु यत्प्रभावान्-
माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन ।
मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्धं
मन्दालसं च मकरालयकन्यकायाः ॥ ६॥

विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षं
आनन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि ।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्ध-
मिन्दीवरोदरसहोदरमिन्दिरायाः ॥ ७॥

इष्टा विशिष्टमतयोऽपि यया दयार्द्र
दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते ।
दृष्टिः प्रहृष्टकमलोदरदीप्तिरिष्टां
पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः ॥ ८॥

दद्याद्दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारां
अस्मिन्नकिञ्चनविहङ्गशिशौ विषण्णे ।
दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं
नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाहः ॥ ९॥

धीर्देवतेति गरुडध्वजसुन्दरीति   var  गरुडध्वजभामिनीति
शाकम्भरीति शशिशेखरवल्लभेति ।
सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायै
तस्यै नमस्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुण्यै ॥ १०॥

श्रुत्यै नमोऽस्तु शुभकर्मफलप्रसूत्यै
रत्यै नमोऽस्तु रमणीयगुणार्णवायै ।
शक्त्यै नमोऽस्तु शतपत्रनिकेतनायै
पुष्ट्यै नमोऽस्तु पुरुषोत्तमवल्लभायै ॥ ११॥

नमोऽस्तु नालीकनिभाननायै
नमोऽस्तु दुग्धोदधिजन्मभूम्यै ।
नमोऽस्तु सोमामृतसोदरायै
नमोऽस्तु नारायणवल्लभायै ॥ १२॥

नमोऽस्तु हेमाम्बुजपीठिकायै
नमोऽस्तु भूमण्डलनायिकायै ।
नमोऽस्तु देवादिदयापरायै
नमोऽस्तु शार्ङ्गायुधवल्लभायै ॥ १३॥

नमोऽस्तु देव्यै भृगुनन्दनायै
नमोऽस्तु विष्णोरुरसि स्थितायै ।
नमोऽस्तु लक्ष्म्यै कमलालयायै
नमोऽस्तु दामोदरवल्लभायै ॥ १४॥

नमोऽस्तु कान्त्यै कमलेक्षणायै
नमोऽस्तु भूत्यै भुवनप्रसूत्यै ।
नमोऽस्तु देवादिभिरर्चितायै
नमोऽस्तु नन्दात्मजवल्लभायै ॥ १५॥

सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानि
साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि ।  var  सरोरुहाणि
त्वद्वन्दनानि दुरिताहरणोद्यतानि
मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये ॥ १६॥

यत्कटाक्षसमुपासनाविधिः
सेवकस्य सकलार्थसम्पदः ।
सन्तनोति वचनाङ्गमानसैः
त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे ॥ १७॥

सरसिजनिलये सरोजहस्ते
धवळतमांशुकगन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे
त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥ १८॥

दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट
स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम् ।
प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष
लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम् ॥ १९॥

कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं
करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः ।
अवलोकय मामकिञ्चनानां
प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥ २०॥

देवि प्रसीद जगदीश्वरि लोकमातः
कल्यानगात्रि कमलेक्षणजीवनाथे ।
दारिद्र्यभीतिहृदयं शरणागतं मां
आलोकय प्रतिदिनं सदयैरपाङ्गैः ॥ २१॥

स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमूभिरन्वहं
त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् ।
गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो
भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः ॥ २२॥

॥ इति श्रीमद् शङ्कराचार्यकृत
श्री कनकधारास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

अयं स्तवः स्वामिना शङ्करभगवत्पादेन ब्रह्मव्रतस्थेन कालटिनाम्नि
स्वग्राम एवाकिञ्चन्यपरिखिन्नाया द्विजगृहिण्या निर्धनत्वमार्जनाय
निरमायि । तेन स्तवेन प्रीता लक्ष्मीर्विप्रं विपुलधनदानेनाप्रीणयदिति
शञ्करविजयतः समाधिगम्यते, ``स मुनिर्मुरजित्कुटुम्बिनीं
पदचित्रैर्नवनीत कोमलैः ंअधुरैरूपतस्थिवां- स्तवैः''
इत्यादिना ॥ एते श्रीमन्मातुरभ्यर्थनया स्तवमेतमतनिषतेति
कालटिग्रामनिकटवर्तिनां विदुषां मतम् । तदारभ्य कर्णाकर्णिकया
तथानुश्रुतम् ।

॥ श्रीअष्टलक्ष्मीमालामन्त्रम् ॥

॥ श्रीअष्टलक्ष्मीमालामन्त्रम् ॥

अस्य श्रीअष्टलक्ष्मीमालामन्त्रस्य - भृगु ऋषिः - अनुष्टुप् छन्दः -
महालक्ष्मीर्देवता - श्रीं बीजं - ह्रीं शक्तिः - ऐं कीलकं -
श्रीअष्टलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।

ॐ नमो भगवत्यै लोकवशीकरमोहिन्यै,
ॐ ईं ऐं क्षीं, श्री आदिलक्ष्मी, सन्तानलक्ष्मी, गजलक्ष्मी,
धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी,
वीरलक्ष्मी, ऐश्वर्यलक्ष्मी, अष्टलक्ष्मी इत्यादयः मम हृदये
दृढतया स्थिता सर्वलोकवशीकराय, सर्वराजवशीकराय,
सर्वजनवशीकराय सर्वकार्यसिद्धिदे, कुरु कुरु, सर्वारिष्टं
जहि जहि, सर्वसौभाग्यं कुरु कुरु,
ॐ नमो भगवत्यै श्रीमहालाक्ष्म्यै ह्रीं फट् स्वाहा ॥

इति श्रीअष्टलक्ष्मीमालामन्त्रं सम्पूर्णम् ।

॥ श्रीसूक्त (ऋग्वेद) ॥

॥ श्रीसूक्त (ऋग्वेद) ॥

ॐ ॥ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥ १॥

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥ २॥

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् ।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मादेवीर्जुषताम् ॥ ३॥

कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।
पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥ ४॥

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ॥ ५॥

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः ।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः ॥ ६॥

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह ।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ॥ ७॥

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात् ॥ ८॥

गंधद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।
ईश्वरीꣳ सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥ ९॥

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि ।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ॥ १०॥

कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम ।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ॥ ११॥

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ॥ १२॥

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम् ।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥ १३॥

आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥ १४॥

तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान्विन्देयं पुरुषानहम् ॥ १५॥

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्य मन्वहम् ।
श्रियः पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत् ॥ १६॥

                  फलश्रुति
पद्मानने पद्म ऊरू पद्माक्षी पद्मसम्भवे ।
त्वं मां भजस्व पद्माक्षी येन सौख्यं लभाम्यहम् ॥

अश्वदायी गोदायी धनदायी महाधने ।
धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे ॥

पुत्रपौत्र धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवे रथम् ।
प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु माम् ॥

धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः ।
धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरुणं धनमश्नु ते ॥

वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु वृत्रहा ।
सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः ॥

न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभा मतिः ॥

भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां श्रीसूक्तं जपेत्सदा ॥

वर्षन्तु ते विभावरि दिवो अभ्रस्य विद्युतः ।
रोहन्तु सर्वबीजान्यव ब्रह्म द्विषो जहि ॥

पद्मप्रिये पद्मिनि पद्महस्ते पद्मालये पद्मदलायताक्षि ।
विश्वप्रिये विष्णु मनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि सन्निधत्स्व ॥

या सा पद्मासनस्था विपुलकटितटी पद्मपत्रायताक्षी ।
गम्भीरा वर्तनाभिः स्तनभर नमिता शुभ्र वस्त्रोत्तरीया ।
लक्ष्मीर्दिव्यैर्गजेन्द्रैर्मणिगण खचितैस्स्नापिता हेमकुम्भैः ।
नित्यं सा पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमाङ्गल्ययुक्ता ॥

लक्ष्मीं क्षीरसमुद्र राजतनयां श्रीरंगधामेश्वरीम् ।
दासीभूतसमस्त देव वनितां लोकैक दीपांकुराम् ।
श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्ध विभव ब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां ।
त्वां त्रैलोक्य कुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम् ॥

सिद्धलक्ष्मीर्मोक्षलक्ष्मीर्जयलक्ष्मीस्सरस्वती ।
श्रीलक्ष्मीर्वरलक्ष्मीश्च प्रसन्ना मम सर्वदा ॥

वरांकुशौ पाशमभीतिमुद्रां करैर्वहन्तीं कमलासनस्थाम् ।
बालार्क कोटि प्रतिभां त्रिणेत्रां भजेहमाद्यां जगदीश्वरीं ताम् ॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुक गन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरिप्रसीद मह्यम् ॥

विष्णुपत्नीं क्षमां देवीं माधवीं माधवप्रियाम् ।
विष्णोः प्रियसखींम् देवीं नमाम्यच्युतवल्लभाम् ॥

महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमही । 
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥

(आनन्दः कर्दमः श्रीदश्चिक्लीत इति विश्रुताः ।
ऋषयः श्रियः पुत्राश्च श्रीर्देवीर्देवता मताः (स्वयम्
श्रीरेव देवता ॥ ) variation)
(चन्द्रभां लक्ष्मीमीशानाम् सुर्यभां श्रियमीश्वरीम् ।
चन्द्र सूर्यग्नि सर्वाभाम् श्रीमहालक्ष्मीमुपास्महे ॥  variation)
श्रीवर्चस्यमायुष्यमारोग्यमाविधात् पवमानं महीयते ।
धनं धान्यं पशुं बहुपुत्रलाभं शतसंवत्सरं दीर्घमायुः ॥

ऋणरोगादिदारिद्र्यपापक्षुदपमृत्यवः ।
भयशोकमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा ॥

श्रिये जात श्रिय आनिर्याय श्रियं वयो जनितृभ्यो दधातु ।
श्रियं वसाना अमृतत्वमायन् भजंति सद्यः सविता विदध्यून् ॥

श्रिय एवैनं तच्छ्रियामादधाति । सन्ततमृचा वषट्कृत्यं
सन्धत्तं सन्धीयते प्रजया पशुभिः । य एवं वेद ।

ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि ।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥

      ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

॥ श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रम् ॥

॥ श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रम् ॥

(ऋषिः - छन्दः - देवता - ध्यान सहितम्)
श्रीलक्ष्मीनारायणः
अस्य श्रीरमानाथमहामन्त्रस्य -
नारायण ऋषिः - विराट् छन्दः - लक्ष्मीनारायणो देवता -
अं बीजं - उं शक्तिः - मं कीलकं -
अस्य श्रीलक्ष्मीनारायणप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ अङ्गुष्टाभ्यां नमः ॐ नं तर्जनीभ्यां नमः
ॐ रं मध्यमाभ्यां नमः ॐ यं अनामिकाभ्यां नमः
ॐ णं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ यं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
ॐ हृदयाय नमः ॐ नं शिरसे स्वाहा
ॐ रं शिखायै वषट् ॐ यं कवचाय हुं
ॐ णं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ यं अस्त्राय फट्
ॐ भूर्भुवस्युवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम्
श्रीवत्सवक्षसं विष्णुं चक्रशङ्खसमन्वितम् ।
वामोरुविलसल्लक्ष्म्याऽऽलिङ्गितं पीतवाससम् ॥

सुस्थिरं दक्षिणं पादं वामपादं तु कुञ्जितम् ।
दक्षिणं हस्तमभयं वामं चालिङ्गितश्रियम् ॥

शिखिपीताम्बरधरं हेमयज्ञोपवीतिनम् ।
एवं ध्यायेद्रमानाथं पश्चात्पूजां समाचरेत् ॥

मूलमन्त्रम् - ॐ नमो नारायणाय ।
श्री आदिलक्ष्मीः
अस्य श्री आदिलक्ष्मीमहामन्त्रस्य -
भार्गव ऋषिः - अनुष्टुबादि नाना छन्दांसि - श्री आदिलक्ष्मीर्देवता -
श्रीं बीजं - ह्रीं शक्तिः - ऐं कीलकं -
श्रीमदादि महालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ श्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नम ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः
ॐ ऐं मध्यमाभ्यां नम ॐ श्रीं अनामिकाभ्यां नमः
ॐ ह्रीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ ऐं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
ॐ श्रीं हृदयाय नमः ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा
ॐ ऐं शिखायै वषट् ॐ श्रीं कवचाय हुं
ॐ ह्रीं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ ऐं अस्त्राय फट्
ॐ भूर्भुवस्युवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम्
द्विभुजां च द्विनेत्रां च साभयां वरदान्विताम् ।
पुष्पमालाधरां देवीं अम्बुजासनसंस्थिताम् ॥

पुष्पतोरणसम्युक्तां प्रभामण्डलमण्डिताम् ।
सर्वलक्षणसम्युक्तां सर्वाभरणभूषिताम् ॥

पीताम्बरधरां देवीं मकुटीचारुबन्धनाम् ।
सौन्दर्यनिलयां शक्तिं आदिलक्ष्मीमहं भजे ॥

मूलमन्त्रं - ॐ श्रीं आदिलक्ष्म्यै नमः ।

श्रीसन्तानलक्ष्मी
अस्य श्रीसन्तानलक्ष्मीमहामन्त्रस्य -
भृगु ऋषिः - निचृत् छन्दः - श्रीसन्तानलक्ष्मीः देवता -
श्रीं बीजं - ह्रीं शक्तिः - क्लीं कीलकं -
अस्य श्रीसन्तानलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ स्रां अङ्गुष्टाभ्यां नमः ॐ स्रीं तर्जनीभ्यां नमः
ॐ स्रूं मध्यमाभ्यां नमः ॐ स्रैं अनामिकाभ्यां नमः
ॐ स्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ स्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
ॐ स्रां हृदयाय नमः ॐ स्रीं शिरसे स्वाहा
ॐ स्रूं शिखायै वषट् ॐ स्रैं कवचाय हुं
ॐ स्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ स्रः अस्त्राय पट्
ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम्
जटामकुटसम्युक्तां स्थिरासन्समन्विताम् ।
अभयं कटकञ्चैव पूर्णकुम्भं करद्वये ॥

कञ्चुकं सन्नवीतञ्च मौक्तिकञ्चापि धारिणीम् ।
दीपचामरहस्ताभिः सेवितां पार्श्वयोर्द्वयोः ॥

बालसेनानिसङ्काशां करुणापूरिताननाम् ।
महाराज्ञीं च सन्तानलक्ष्मीमिष्टार्थसिद्धये ॥

मूलमन्त्रम् - ॐ श्रीं सन्तानलक्ष्म्यै नमः ।

श्रीगजलक्ष्मीः
अस्य श्रीगजलक्ष्मीमहामन्त्रस्य -
शुक्र ऋषिः - अनुष्टुप् छन्दः - गजलक्ष्मीः देवता -
कं बीजं - मं शक्तिः - लं कीलकं -
श्रीगजलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ क्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ क्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ क्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ क्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ क्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ क्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥

ॐ क्रां हृदयाय नमः ।
ॐ क्रीं शिरसे स्वाहा ।
ॐ क्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ क्रैं कवचाय हुं ।
ॐ क्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।
ॐ क्रः अस्त्राय पट् ।
ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम् ।
चतुर्भुजां महालक्ष्मीं गजयुग्मसुपूजिताम् ।
पद्मपत्राभनयनां वराभयकरोज्ज्वलाम् ॥

ऊर्ध्वं करद्वये चाब्जं दधतीं शुक्लवस्त्रकम् ।
पद्मासने सुखासीनां गजलक्ष्मीमहं भजे ॥

मूलमन्त्रं - ॐ श्रीं गजलक्ष्म्यै नमः ।

श्रीधनलक्ष्मीः
अस्य श्रीधनलक्ष्मीमहामन्त्रस्य -
परब्रह्म ऋषिः - अनुष्टुप्छन्दः - श्रीधनलक्ष्मीः देवता -
लं बीजं - धं शक्तिः - मं कीलकं -
श्रीधनलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ त्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ॐ त्रीं तर्जनीभ्यां नमः
ॐ त्रूं मध्यमाभ्यां नमः ॐ त्रैं अनामिकाभ्यां नमः
ॐ त्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ॐ त्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः
ॐ त्रां हृदयाय नमः ॐ त्रीं शिरसे स्वाहा
ॐ त्रूं शिखायै वषट् ॐ त्रैं कवचाय हुं
ॐ त्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ॐ त्रः अस्त्राय फट्
ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम्
किरीटमुकुटोपेतां स्वर्णवर्णसमन्विताम् ।
सर्वाभरणसम्युक्तां सुखासनसमन्विताम् ॥

परिपूर्णञ्च कुम्भञ्च दक्षिणेन करेण तु ।
चक्रं बाणञ्च ताम्बूलं तदा वामकरेण तु ॥

शङ्खं पद्मञ्च चापञ्च कुण्डिकामपि धारिणीम् ।
सकञ्चुकस्तनीं ध्यायेत् धनलक्ष्मीं मनोहराम् ॥

मूलमन्त्रम् - ॐ श्रीं धनलक्ष्म्यै नमः ।

श्रीधान्यलक्ष्मीः
अस्य श्रीधान्यलक्ष्मीमहामन्त्रस्य -
परब्रह्म ऋषिः - अनुष्टुप्छन्दः - श्री धान्यलक्ष्मीः देवता -
धं बीजं - लं शक्तिः - मं कीलकं -
श्रीधान्यलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ द्रां अङ्गुष्टाभ्यां नमः ।
ॐ द्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ द्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ द्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ द्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ द्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥

ॐ द्रां हृदयाय नमः ।
ॐ द्रीं शिरसे स्वाहा ।
ॐ द्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ द्रैं कवचाय हुं ।
ॐ द्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।
ॐ द्रः अस्त्राय फट् ।
ॐ भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम् ।
वरदाभयसम्युक्तां किरीटमकुटोज्ज्वलाम् ।
अम्बुजञ्चेक्षुशालिञ्च कदम्बफलद्रोणिकाम् ॥

पङ्कजञ्चाष्टहस्तेषु दधानां शुक्लरूपिणीम् ।
कृपामूर्तिं जटाजूटां सुखासनसमन्विताम् ॥

सर्वालङ्कारसम्युक्तां सर्वाभरणभूषिताम् ।
मदमत्तां मनोहारिरूपां धान्यश्रियं भजे ॥

मूलमन्त्रम् - ॐ श्रीं धान्यलक्ष्म्यै नमः ।

श्रीविजयलक्ष्मीः ।
अस्य श्रीविजयलक्ष्मीमहामन्त्रस्य -
नारद ऋषिः - नाना छन्दांसि - श्रीविजयलक्ष्मीः देवता -
लं बीजं - क्षं शक्तिः - यं कीलकं -
सर्वकार्यसिद्धिद्वारा श्रीविजयलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ व्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ व्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ व्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ व्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ व्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ व्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥

ॐ व्रां हृदयाय नमः ।
ॐ व्रीं शिरसे स्वाहा ।
ॐ व्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ व्रैं कवचाय हुं ।
ॐ व्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।
ॐ व्रः अस्त्राय फट् ।
ॐ भूर्भुवस्युवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम् ।
अष्टबाहुयुतां देवीं सिम्हासनवरस्थिताम् ।
सखासनां सुकेशीञ्च किरीटमुकुटोज्ज्वलाम् ॥

श्यामाङ्गीं कोमलाकारां सर्वाभरणभूषिताम् ।
खड्गं पाशं तदा चक्रमभयं सव्यहस्तके ॥

खेटकञ्चाङ्कुशं शङ्खं वरदं वामहस्तके ।
राजरूपधरां शक्तिं प्रभासौन्दर्यशोभिताम् ॥

हंसारूढां स्मरेद्देवीं विजयां विजयप्रदे ॥

मूल्मन्त्रं - ॐ श्रीं विजयलक्ष्म्यै नमः ।

श्रीधैर्य(वीर)लक्ष्मीः
अस्य श्रीवीरलक्ष्मीमहामन्त्रस्य -
नारद ऋषिः - तृष्टुप्छन्दः - श्रीवीरलक्ष्मीः देवता -
लं बीजं - रं शक्तिः - लं कीलकं -
आरोग्यभाग्यसिद्धिद्वारा श्रीवीरलक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ व्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ व्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ व्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ व्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ व्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ व्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥

ॐ व्रां हृदयाय नमः ।
ॐ व्रीं शिरसे स्वाहा ।
ॐ व्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ व्रैं कवचाय हुं ।
ॐ व्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।
ॐ व्रः अस्त्राय फट् ।
ॐ भूर्भुवस्युवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम् ।
अष्टबाहुयुतां लक्ष्मीं सिम्हासनवरस्थिताम् ।
तप्तकाञ्चनसङ्काशां किरीटमकुटोज्ज्वलाम् ॥

स्वर्णकञ्चुकसंयुक्तां सन्नवीततरां शुभाम् ।
अभयं वरदं चैव भुजयोः सव्यवामयोः ॥

चक्रं शूलञ्च बाणञ्च शङ्खं चापं कपालकम् ।
दधतीं धैर्यलक्ष्मीं च नवतालात्मिकां भजे ॥

मूलमन्त्रम् - ॐ श्रीं वीरलक्ष्म्यै नमः ।

श्री ऐश्वर्य(महा)लक्ष्मीः
अस्य श्रीमहालक्ष्मीमहामन्त्रस्य -
ब्रह्मा ऋषिः - जगती छन्दः - श्रीमहालक्ष्मीः देवता -
ह्रां बीजं - ह्रीं शक्तिः - ह्रूं कीलकं -
श्रीमहालक्ष्मीप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
ॐ क्ष्रां अङ्गुष्टाभ्यां नमः ।
ॐ क्ष्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ क्ष्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ क्ष्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ क्ष्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ क्ष्रः करतलकरपृष्ठाभ्यांनमः ॥

ॐ क्ष्रां हृदयाय नमः ।
ॐ क्ष्रीं शिरसे स्वाहा ।
ॐ क्ष्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ क्ष्रैं कवचाय हुं ।
ॐ क्ष्रौं नेत्राभ्यां वौषट् ।
ॐ क्ष्रः अस्त्राय फट् ।
ॐ भूर्भुवस्युवरोमिति दिग्बन्धः ॥

ध्यानम् ।
चतुर्भुजां द्विनेत्राञ्च वराभयकरान्विताम् ।
अब्जद्वयकराम्भोजां अम्बुजासनसंस्थिताम् ॥

ससुवर्णघटोराभ्यां प्लाव्यमानां महाश्रियम् ।
सर्वाभरणशोभाढ्यां शुभ्रवस्त्रोत्तरीयकाम् ॥

चामरग्रहनारीभिः सेवितां पार्श्वयोर्द्वयोः ।
आपादलम्बिवसनां करण्डमकुटां भजे ॥

मूलमन्त्रम् - अं श्रीं श्रीमहालक्ष्म्यै नमः ॥

इति श्रीअष्टलक्ष्मीमहामन्त्रं सम्पूर्णम् ।

Sunday, 4 August 2019

शापमोचन सूक्त


ओम अस्य: शापमोचन सूक्त; अथर्वा,बादरायणि ऋषि:, भैषज्य, आयु, वनस्पति, चन्द्रमा, अरिनाशन देवता:, भुरिग् अनुष्टुप्, अनुष्टुप् अनुष्टुप्विराडुपरिष्टाद् बृहती छन्द: शापमोचन हेतवे जपे विनियोग:

ओ३म् अ॒घद्वि॑ष्टा दे॒वजा॑ता वी॒रुच्छ॑पथ॒योप॑नी आपो॒ मल॑मिव॒ प्राणै॑क्षी॒त्सर्वा॒न्मच्छ॒पथाँ॒ अधि॑ ओ३म् यश्च॑ साप॒त्नः श॒पथो॑ जा॒म्याः श॒पथ॑श्च॒ यः ब्र॒ह्मा यन्म॑न्यु॒तः शपा॒त्सर्वं॒ तन्नो॑ अधस्प॒दम् ॥ओ३म् दि॒वो मूल॒मव॑ततं पृथि॒व्या अध्युत्त॑तम् तेन॑ स॒हस्र॑काण्डेन॒ परि॑ णः पाहि वि॒श्वतः॑ ओ३म् परि॒ मां परि॑ मे प्र॒जां परि॑ णः पाहि॒ यद्धन॑म् अरा॑तिर्नो॒ मा ता॑री॒न्मा न॑स्तारि॒शुर॒भिमा॑तयः ओ३म् श॒प्तार॑मेतु श॒पथो॒ यः सु॒हार्त्तेन॑ नः स॒ह चक्षु॑र्मन्त्रस्य दु॒र्हार्दः॑ पृ॒ष्टीरपि॑ शृणीमसि ॥ओ३म् उप॒ प्रागा॑त्सहस्रा॒क्षो यु॒क्त्वा श॒पथो॒ रथ॑म् श॒प्तार॑मन्वि॒छन्मम॒ वृक॑ इ॒वावि॑मतो गृ॒हम् ओ३म् परि॑ णो वृङ्ग्धि शपथ ह्र॒दम॒ग्निरि॑वा॒ दह॑न् श॒प्तार॒मत्र॑ नो जहि दि॒वो वृ॒क्षमि॑वा॒शनिः॑ ओ३म् यो नः॒ शपा॒दश॑पतः॒ शप॑तो॒ यश्च॑ नः॒ शपा॑त् शुने॒ पेष्ट्र॑मि॒वाव॑क्षामं॒ तं प्रत्य॑स्यामि मृ॒त्यवे॑ ॥ओ३म् यो नः॑ शपा॒दश॑पतः॒ शप॑तो॒ यश्च॑ नः॒ शपा॑त् वृ॒क्ष इ॑व वि॒द्युता॑ ह॒त मूला॒दनु॑ शुष्यतु